क्या गरीब को इस दुनियाँ में,
जीने का अधिकार नहीं है ।
पग पग पर मैं मार खा रहा
कहते ये कुछ मार नहीं है ॥
तू रिक्शे मैं बैठ रहा ,
मैं हूँ रिक्शे को खींच रहा।
उचित मूल्य मुझे नहीं मिलता,
तू है पैसै को भींच रहा ॥
उद्योग अनेक लगे तेरे,
मुझको निजी श्रमिक बतलाता ।
अपार धन संग्रहित तुझ पर,
मुझे कोई सारोकार नहीं है
क्या गरीब को इस दुनियाँ में,
जीने का अधिकार नहीं है ॥
एअर कंडीशन बंगले तुम्हारे,
मुझे फ़ुट्पाथ नसीब नहीं है।
हीटर गर्म करें तुझको ,
मुझे अलाव नसीब नहीं है ॥
श्वेत वस्त्र मंच के ऊपर ,
सम्भाषित करता निज ब्यान ।
मैं किस मुख से उच्चारित कर दूँ ,
यह सरकार ,सरकार नहीं है ,
क्या गरीब को इस दुनियाँ में,
जीने का अधिकार नहीं है ॥
अग्रसर तू उन्नति पथ पर,
मैं हूँ पीछे को भाग रहा ।
मध्यांतर इतना गहन हुआ,
फ़िर भी नहीं कोई जाग रहा ॥
यदि यही क्रम उन्नत पथ का,
पौराणिक बिन्दु सही होंगे ।
कलियुग का अंत निकट मैं है,
न हम ही होंगें, न तुम ही होगे ॥
जीवन मरण विधि विधान है,
’ब्रजेश’ किसी का अधिकार नहीं है,
क्या गरीब को इस दुनियाँ में,
जीने का अधिकार नहीं है ॥
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24 अक्टूबर 2010
11 अक्टूबर 2010
स्तुति

जय जगदम्बे अम्बिका,
हरायु मात क्लेश।
कलम विराजो सरस्वती
ब्रह्मा विष्णु महेश।।
ब्रजेश ह्र्दय से आस तुम्हारी करता ।
शीश झुकाऊँ चरण में, ध्यान तेरा ही धरता॥
पथवारी , व्रतवारी और सुमिरू कोटावारी ।
बुद्धि विवेक संकुचित , है शब्दों से लाचारी ॥
पवनपुत्र शक्ति दीजै , काली माँ करि रक्षा ।
अन्तृद्वंद मचा भरत में , और न लेउ परीक्षा॥
10 अक्टूबर 2010
मेरे दादा जी

मेरे आदर्श मेरे दादा जी हैं । जो कि एक सेवानिवृत पुलिस
अधिकारी हैं । मैं यहाँ उनके द्वारा रचित हास्य कविताऎं
, व्यंग कविताऎं उनके उपनाम " ब्रजेश " के अन्तर्गत
प्रस्तुत कर रहा हूँ , आशा है आप पसन्द करेंगे.............
सर्वप्रथम प्रस्तुत है उनका परिचय (वाह री ब्लाग दुनिया हम
जिनके परिचय के मोहताज़ हैं , उनका परिचय करा रहें हैं...)
उन्ही के शब्दों में.............
उत्तर प्रदेश के मथुरा नगर के चौरासी कोस की परिधी से
आच्छादित ब्रज के गाँव भगतुआ डाकखाना कोटा परगना

हाथरस जनपद महामाया नगर के एक साधारण कृषक परिवार
में स्वर्गीय श्री ज्योतिराम जाट के यँहा ३० जनवरी १९४० को
जन्म हुआ । गणेश सिंह इंटर कालेज मुरसान से सन १९५९
में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण कर तदुपरान्त १९६० से
उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद पर सेवा प्रारम्भ की तथा
वर्ष १९७४ में सब इन्सपेक्टर पद पर प्रोन्नत हुआ ।सन १९९८
में मेरठ परिक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक के रीडर पद से सेवानिवृत
हुआ । शिक्षा ग्रहण करने में उत्सुकता के कारण वर्ष १९८६
में बी ए तथा वर्ष १९९३ में एल एल बी की परीक्षा चौधरी चरण
सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से प्राप्त उत्तीर्ण की ।
प्रारम्भ से ही साहित्य , पारिवारिकता एवं समाजिकता से
सम्बद्ध रहे । कर्तव्य ही पूजा है तथा पुलिस वर्दी एवं शासन
के सर पर ताज की मर्यादा एवं आन को सुरक्षित रखने के
निमित्त सर्वदा चिंतित रहे । जीवन अत्यंत मितव्ययी एवं
शालीनता से यापन करते हुए अनुशासन जीवन का मूलधार
रहा । वर्तमान में गाँव में रहकर धर्म कर्म में संलग्न हैं ।
बीरी सिंह "ब्रजेश"
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